डायमंड लीग से बढ़ा पारुल चौधरी का आत्मविश्वास, अब राष्ट्रमंडल खेलों में पदक पर नजर

 नई दिल्ली

 भारत की लंबी दूरी की धाविका पारुल चौधरी अब केवल एशियाई स्तर की खिलाड़ी नहीं रह गई हैं। पिछले एक साल में उन्होंने डायमंड लीग जैसी विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में नियमित भाग लेकर खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है।

पारुल का मानना है कि दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और इससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। मेरठ की 31 वर्षीय एथलीट 2022 एशियाई खेलों में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज (बाधा दौड़) में रजत पदक जीत चुकी हैं। वहीं पिछले साल गुमी में हुई एशियाई चैंपियनशिप में पारुल ने दोनों स्पर्धाओं में रजत पदक जीता था।

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पारुल ने बताया अपना लक्ष्य
पारुल का लक्ष्य अब इस साल जुलाई में होने वाले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है। पारुल ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि पहले भारतीय एथलीटों को विदेशों में खेलने के ज्यादा अवसर नहीं मिलते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 2016 से राष्ट्रीय कैंप का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें पहली बार 2022 में विदेश में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिला।

अब युवा खिलाड़ियों को लगातार अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिल रहा है, जिसका फायदा भारतीय एथलेटिक्स को मिल रहा है। भारतीय ट्रैक एंड फील्ड में अब तक स्पिरंट और फील्ड इवेंट के खिलाड़ियों को ज्यादा पहचान मिली है, लेकिन पारुल ने लंबी दूरी की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने से खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन को समझने और सुधारने का मौका मिलता है।

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पदक जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य
लंबी दूरी की दौड़ के अंतिम चरण को सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पारुल के अनुसार अंतिम एक किलोमीटर में खुद को मजबूत बनाए रखना बेहद अहम होता है और इसके लिए कोच विशेष ट्रेनिंग और रणनीति तैयार करते हैं।

पारुल ने बताया कि बेंगलुरु में ट्रेनिंग के दौरान खिलाड़ियों को स्पो‌र्ट्स साइंस, रिकवरी मॉनिटरिंग और फिटनेस से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है। हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों की क्वालीफाइंग टाइमिंग की बराबरी करने वाली पारुल ने कहा कि अगर उन्हें क्वालिफाई करने का मौका मिलता है तो उनका लक्ष्य वहां भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करना होगा। फिलहाल उनका पूरा फोकस निरंतर सुधार और बड़े मंच पर देश के लिए पदक जीतने पर है।

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